चवन्नी अब भी बाकी है…. (व्यंग)

thief1

चवन्नी अब भी बाकी है….

रुपये लूट ले गये, चवन्नी अब भी बाकी है
रुको अभी शहीदों के धर्म बताना बाकी है ।।

व्यस्त है सभी अपने पैतरे दिखाने में
कोई चवन्नी बचा रहा
कोई व्यस्त है रुपये कमाने में
घोटाले फिर भी थमते नहीं
क्योंकि… चवन्नी अब भी बाकी है ।।

कोई तिजोरी अब सुरक्षित नहीं
टक्साल में हुई चोरी है
पहले और अब के सरकारों के बीच
चल रही बस ज़ोरा जोरी है
क्योंकि… चवन्नी अब भी बाकी है ।।

किसने किया कौन दोषी है
जनता बेचारी बस रोती है
सब लगे है अपने पल्ला झाड़ने में
सब लगे है एक दूसरे को नीचा दिखाने में
क्योंकि… चवन्नी अब भी बाकी है ।।

दुख संताप घरों में फैल रहा
आतंक नश नश में बोल रहा
शहीद होते, जवानों की टोली में
मतलब साही ढूंढ रहे
अपनी रुचि शाहिदों की जाति में
क्योंकि… चवन्नी अब भी बाकी है ।।

कर चूस रहा है खून
पसीना सूखा रहा है धूप
किसान आकाल से पीड़ित है
फट गई है धरती सुख गये है आँसू
शासक और उसकी नीति उससे जीवित है
क्योंकि… चवन्नी अब भी बाकी है ।।

ये कैसा दुर्भाग्य है हिन्द का
यहाँ घोटाले अब बोलते हैै
निष्छल लूटा दिये देशभक्त अपने प्राण
इन स्वतंत्र लोग के दिलों में
आज ईषा , द्वेष , लोभ , स्वार्थ बोलते है
क्योंकि… चवन्नी अब भी बाकी है ।।

दलों में बट गये है लोग सभी
सब कहते फिरते है अपनी जाति है
शहीदों के है कान तरस रहे
कोई तो कह दे हम भारतवासी है
खजाना लूट ले गये अंग्रेज
‘यज्ञ’… अभी लूट बाकी है
क्योंकि… चवन्नी अब भी बाकी है ।।
#यज्ञ – यज्ञदत्त साहू

chavnni

Chavanni ab bhi baaki hai…

Rupaye loot le gaye, chavanni ab bhi baaki hai
ruko abhi shahidon ke dharma bataana baaki hai ||

Vyasta hai sabhi apne paitare dikhaane me
koi chavanne bacha raha
koi vyasta hai rupaye kamaane me
ghotale fir bhi thamate nahi
kyonki… chavanni ab bhi baaki hai ||

koi tijori surkshit nahi
taksaal me hui chori hai
pahale or ab ke sarkaron ke beech
chal rahi bas zora zori hai
kyonki… chavanni ab bhi baaki hai ||

kisane kiya koun doshee hai
janata bechaari bas rotee hai
sab lage hai apne palla jhadne me
sab lage hai ek dusare ko neecha dikhane me
kyonki… chavanni ab bhi baaki hai ||

dukha santaap gharon me fail rha
aatank nasha nasha me bola rha
shahid hote, javano ki toli me
matalab saahi dhundh rahe
apni ruchi shahidon ki jaati me
kyonki… chavanni ab bhi baaki hai ||

kar chusa raha hai khoon
paseena sukhaa raha hai dhoop
kisaan aakaal se peedit hai
fat gai hai dhartee sukha gaye hai aansu
shaasak or usaki neeti usase jeevit hai
kyonki… chavanni ab bhi baaki hai ||

ye kaisa durbhaagya hai hind kaa
yahaan ghotale ab bolti hai
nishdhhal loota diye deshbhaqt apne praana
in swatantra loga ke dilon me
aaj irsha, dwesh , lobha, swaarth, boolti hai
kyonki… chavanni ab bhi baaki hai ||

dalon me bat gaye hai log sabhi
kahte firate hai apni apni jaati hai
shahidon ke hai kaan tars rahe
koi to kah de ham bhaartvaasee hai
khajaana loot le gaye aangrej
abhi loot baaki hai
kyonki… chavanni ab bhi baaki hai ||

#Yagya Yagnadutta Sahu

 

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ये हिंद है… ये हिंद है …. जय हिंद

ये हिंद है , ये हिंद है
ये जान है , ये मान है
ये वीरों का , ये समान है ।।

ये वीर है, ये शौर्य है
ये त्याग है , ये बलिदान है
ये सृष्टि का, ये वरदान है ।।

ये ताल है, ये मृदंग है
ये गीत है , ये मनमीत है
ये उमड़ती हुई , ये संगीत है ।।

ये ज्ञान है , ये विज्ञान है
ये ओज है, ये तेज है
ये गंगा का , ये वेग है ।।

ये धर्म है, ये कर्म है
ये संस्कार है, ये भाषा-जाति-वेश है
ये संस्कृति का , ये समावेश है ।।

ये हिंद है , ये हिंद है
ये गद्य है, ये पद्य है
ये भक्ति का , ये काव्य है ।।

ये हिंद है, ये हिंद है
ये भूत है, ये वर्तमान है
ये भविष्य का, ये आगाज है ।।

जो अमिट है, जो अचल है
जो तेरा मेरा, मान है
जो जगत का, सार है
ये हिंद है, ये हिंद है ।।
।। जय हिंद ।।

जय हो हिंद का … जय हिंद

जय हो हिंद का
विजय हो मेरे देश का
पूरब पश्चिम ही नहीं
हर दिशा जय हो मेरे देश का ।।

प्रेम हिंद प्रियतमा हिंद
कानों में संगीत बजे मेरे देश का
स्वप्न भी हिंद सत्य भी हिंद
बावला रहे मेरा मन देश का ।।

।। जय हिंद ।।

दोस्त… उसका दर्द आज भी है

वो दोस्त आज भी दोस्त ही है
दूर है मगर आज भी दोस्त ही है
दूर है मगर मैं उसे, उसे मुझे याद भी है
एक दफा किया था मोहब्बत
न वो करीब है न साथ है
दोस्त बस … उसका दर्द आज भी है ।।

मेरे… दोस्त 🎭

हम भी कभी करीब थे
मगर समय की मार ने
हमे एक दूसरे से दूर कर दिया ।।

हम’मे भी कभी नोक झोंक होता था
मगर समय को ये भी मंजूर न था
वो लुफ्त भी हम’से छीन लिया ।।

वो रुठना मनाना भी गुम हुआ
कभी हम कभी वो एक दूसरे को मानते
समय ने ये भी छीन लिया ।।

मेरे जीवन का अहम पहलू है
मेरे… दोस्त
जो हम’से , हम उन’से दूर है
मगर आज भी करीब है ।।

ये मरज़…

क्या इसको कहें, क्या उसको कहें
न इसकी खत न उसकी खत
तो यकीनन, है ये मरज़ इश्क़ का ।।

न बात बनती है, न बात बिगड़ती है
न हबीब से न रक़ीब से जमती है
तो यकीनन , है ये मरज़ इश्क़ का ।।

कहीं खो गया …

वो सुकून वाला रविवार
है कहीं खो गया
वो बच्चों का बचपन
है कहीं खो गया ।।

नन्हें कदम के बस्ते भारी
माता पिता को समय नहीं
बच्चे लड़खड़ा के चलते है
खुलकर हंसते है न खुलकर खेलते है
प्रतिस्पर्धा है अंक का, दौड़ है प्रतिशत का
बस दौड़ रहे बस रहे
जो अभी चलना है सीखे
कोई जीत गया कोई हार गया
पर… दिख क्यों नहीं रहा
वो मासूमियत कहीं खो गया ।।

ये मरज़ है …

जब, नीम मीठी , शहद कड़वी लगे
तो , ये मरज़ है… इश्क़ का ।।

संजीदा हो, खलबत पसन्द करने लगे
तो, ये मरज़ है…. इश्क़ का ।।

खलबत – एकांत, तन्हाई